35Shahid diwas Hindi Shayari (शाहिद दिवस शायरी)


आओ झुक कर सलाम करे उनको

जिनके हिस्से में ये मुकाम आता हैं

खुशनसीब होता है वो खून

जो देश के काम आता है

देश के शहीद को शत शत नमन


जब तुम शाहिद हुए थे 

ना जाने कैसे तेरी मां सोयी होगी

एक बात तो तय है तुम्हे

लगने वाली गोली भी सौ बार रोयी होगी

देश के शहीदों को शत शत नमन


तिरंगों में लिपटी लाशो में दो थे नाम 

एक था अली तो एक था श्याम

हिंदुस्तान ऐ मोहब्ब्त में दोनों ही दे दी थी जान

फ़िर हमने उन्हें बांट दिया कहकर

हिन्दू और मुसलमान

जय हिंद जय भारत


वतन वाले वतन ना बेच देना

ये धरती ये चमन ना बेच देना

शहीदों ने जान दी है वतन के वास्ते

शहीदों के कफ़न ना बेच देना 

जय हिंद


अपनी आजादी को हरगिज़ भुला नही सकते

सर काटा सकते है लेकिन सर झुका नही सकते

देश के शहीद को शत शत नमन


फौजियों पर शहीद दिवस पर शायरी

मेरी ज़िंदगी मे शरहद की कोई काम आए

काश मेरी ज़िंदगी मेरे वतन के काम आए

ना खौफ है मौत का ना आरजू है जन्नत का

खवाइश बस इतनी सी है जब भी जिक्र हो

शहीदों का तब मेरा भी नाम आये


चलो आज फिर वो नज़ारा याद कर ले

शहीदों के दिल मे थी जो ज्वाला वो याद कर ले

जिसमे बह कर पहुँची थी आजादी किनारे पे

देश भक्तो के खून की वो धारा को याद कर ले

जय हिंद


इतनी सी बात हवाओ को बताए रखना

रौशनी होगी चिरागो को जलाए रखना

लहूँ देकर हम ने की है जिसकी हिफ़ाज़त

ऐसे तिरेंगे को हमेशा दिल मे बसाये रखना

देश के शहीदों को शत शत नमन

जय भारत माँ


दुश्मन की गोलियां ला हम समाना कर लेंगे

हम आजाद है आजाद ही रहेंगे

जय हिन्द


कभी कड़ाके के ठंड में ठिठुर कर देखना

कभी तपती धूप में चल कर देखना

कैसे होते है हिफ़ाज़त अपने देश की

जरा शरहद पे जाकर देखना

जय हिंद


ना पूछो जमाने से हमारी कहानी क्या है

हमारी पहचान तो सिर्फ ये है की

हम सिर्फ हिंदुस्तानी है


मैं जला हुआ राख नही अमर दीप हूँ

जो मिट गया वतन पे मैं वो शाहिद हूँ

देश के शहीदों को शत शत नमन

जय हिंद


लड़े वो वीर जवानों के तरह

ठंडा खून भी फौलाद हुआ

मरते मरते भी कई मार गिराए

तभी तो देश आजाद हुआ

जय हिंद


प्रेम गीत कैसे लिखूं जब

चारो तरफ गम के बादल छाए है

नमन है उन वीर शहीदों को

जो तिरंगा ओढ़ कर आये है

जय हिंद


उड़ जाती है नींद ये सोच कर की

सरहद पे दी गयी कुर्बानियां 

मेरी नींद के लिए थी


सीने में जुनून आंखों में देशभक्ति 

का चमक रखता हूँ

दुश्मन के सांस थम जाए वो आवाज़

 में धमक रखता हूँ

जय हिन्द


देश मे थी दीवाली वो खेल रहे थे होली

जब हम बैठे घरो में वो झेल रहे थे गोली

जय हिंद


मुकमल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ

वतन की शान की खातिर हथेली पर जान रखता हूँ

क्यों पढ़ते हो मेरे आंखों में नक्शा किस और का

देश भक्त हूँ दिल मे हिंदुस्तान रखता हूँ



मैं मुल्क की हिफाज़त करूँगा

ये मुल्क मेरी जान है

इसकी रक्षा के लिए मेरी दिल

और मेरी जान कुर्बान हैं


ना जाने किस मिट्टी के बने थे

देश की सेवा में हर दिन थमे थे

जवानियो उन्होंने जेलों में गुज़ार दी

देश की खातिर अपनी जान वार दी

जय हिंद


संस्कार सँस्कृति का शान मिले ऐसे

हिंदू मुस्लिम और हिन्दुतान मिले ऐसे

हम मिलजुल कर रहे है ऐसे की

मंदिर में अल्लाह और महजिद में राम मिले जैसे


दम निकले इस देश की खातिर

बस मेरा यही अरमान है

एक बार इस राह पर मरना

100जन्मो के समान है


वर्दी में भी छुपा देश का शान है

वर्दी को बईमान कहने वाले

पहले ये देखो की तुममे कितना ईमान है


वर्दी पहन लो तो बुराईया खत्म करने

 की चाहत जगती है

जब सियासत जब हाथ बांध दे

तो वर्दी सजा सी लगती है

जय हिंद


होगा तेरा हीरो सलमान खान

जो जमानत ना मिलने पे रोया था

मेरा हीरो तो भगत सिंह है

जो फाँसी मिलने पर भी मुस्कुराया था


मिटा दिया वजूद इनका जो भी इनसे भिड़ा है

देश के रक्षा का संकल्प के लिए जो 

जो जवान सरहद पे खड़ा रहा है


हिमालय से ऊंचा साहस उनका

सर जो किसी के आगे ना झुका

मातृभूमि के खातिर किया सब अर्पण

ऐसा वीरो का नमन


खुशबू बन कर हम महका करेंगे हम 

हर लहराती फसलों में

सांस बनकर के गुनगुनायेंगे आने

 वाली हर नस्लो में


यहाँ आरती है अनजान है हिन्दू और मुसलमान है

गर्व है मुझे इस देश पर क्योंकि मेरा हिंदुस्तान है


गुलाम बने इस देश को तूने आजाद कराया हैं

सुरक्षित जीवन देकर तुमने कर्ज अपना चुकाया हैं

दिल से तुमको नमन करते है ये आजाद

वतन जो दिलाया

जय हिंद


करता हूं भारत माता से गुज़ारिश की

तेरी भक्ति के सिवा कोई बंदगी ना मिले

हर जन्म मिले हिन्दुतान की पावन धरा पर

या फिर कभी ज़िंदगी न मिले


लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा 

मेरे लहू का हर एक क़तरा इंकलाब लाएगा

मैं रहूँ या ना रहूँ पर वादा है तुमसे मेरा की

मेरे बाद वतन पे मरने वाले का सैलाब आएगा


सोने पर जो जख्म है सब फूलो के गुच्छे है

हमे पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे हैं



शहीदों की चिताओ पर लगेंगे हर बरस मेले

वतन पे मरने वाले की यही बाकी निशा है


ये वतन ये वतन हमको तेरी कसम

फूल क्या चीज़ है तेरे कदमो में हम

भेंट अपने सरो की चढ़ा जाएंगे



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